मसूरी में 400 साल से भी अधिक पुराना पंचाग संरक्षण के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रहा है. यह पंचांग मसूरी में इतिहासकार गोपाल भारद्वाज के पास मौजूद है. 'दिवाकर' नाम का पंचाग सन 1590 में लिखा गया. यह पंचांग हस्त लिखित है. सरंक्षण के अभाव में पंचाग करीब 122 पेज का रह गया है. इस दुर्लभ पंचाग के सरंक्षण के लिए गोपाल भारद्वाज ने शासन प्रशासन से लेकर पुरातत्व विभाग और तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी और डॉक्टर केके पाल के पास भी गए. लेकिन बात नहीं बनी. गोपाल भारद्वाज का कहना है कि प्रदेश के दो राज्यपालों ने इसके सरंक्षण के लिए आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दिया. उन्होंने कहा कि पंचांग देश की धरोहर है. इसके सरंक्षण के लिए शासन प्रशासन को आगे आना चाहिए.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2ChvIlD
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