सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर बसे शिवनगरी बागेश्वर में हर साल मकर संक्रांति के दिन से आठ दिन का ये मेला लगता है. 1921 में अंग्रजों के कुली बेगार कुप्रथा का अंत भी उत्तरायणी के दिन बागेश्वर में ही हुआ था.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2RroWEe
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