उत्तराखंड का जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर इन दिनों ‘बूढ़ी दीपावली’ के रंग में रंगा हुआ है. पांच दिनों तक चलने वाली इस दीपावली में कई कार्यक्रम हो रहे हैं. पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं का तांदी, झैंता और रासो लोकनृत्य के साथ आखिरी दिन काठ के हाथी और हिरण का नृत्य भी लोगों को खासा अकर्षित करता है. जहां पूरे देश में कार्तिक अमावस्या की रात को दीपावली मनाई जाती है, वहीं जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में ठीक इसके एक माह बाद दीपावली मनाने की परंपरा है. इसके पीछे स्थानीय लोगों का मनना है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर क्षेत्र में एक माह बाद पहुंची थी, जिस कारण लोगों ने एक माह बाद दीपावली का पर्व मनाया, जो आज भी जारी है.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2G8TyVQ
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