नक्सली संगठन में रहकर जिंदगी दूभर हो गई थी। जंगल पहाड़ में छिपते-छिपाते दूसरों को प्रताड़ित करना पड़ता था। अब खुलकर जी रहे हैं।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/3fDN5yQ
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नक्सली संगठन में रहकर जिंदगी दूभर हो गई थी। जंगल पहाड़ में छिपते-छिपाते दूसरों को प्रताड़ित करना पड़ता था। अब खुलकर जी रहे हैं।
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