महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए लगातार देश के कोने -कोने से शिव भक्त अपने आराध्य से मिलने नीलकंठ धाम पहुंचने लगे हैं. पहाड़ और जंगल के बीच बसे इस स्थान पर भगवान शिव विराजमान हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार यही वह जगह है जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को अपने कंठ में धारण कर तपस्या की थी. तब जहर के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया था और इसीलिए बाबा भोलेनाथ नीलकंठ महादेव कहलाए.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2Etu9BZ
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