मेट्रो शहरों से होते हुए रैप गायन शैली अब उत्तराखंड के पहाड़ी गीतों में अपनी जगह बना रही है. पिछले पांच सालों से पहाड़ी गानों में रैप का खूब प्रयोग किया जा रहा है. गढ़वाली, कुमाऊंनी, नेपाली जौनसारी शब्दों को रैप में पिरोकर पेश किया जाने लगा है. लुप्त हो रही पहाड़ी बोलियों को रैप के जरिये युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है. संगीत के शौकीन युवा इसे अपना कैरियर बनाने के प्रति गंभीर होने लगे हैं. शायद ये कहना गलत नहीं होगा कि अब पहाड़ी इलाकों में भी गली बॉय तैयार हो रहे हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2BlcE6f
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