सालों बाद पहाड़ों में जमकर हुई बर्फबारी न सिर्फ जलस्रोतों के लिए फायदेंमद है बल्कि पिघलते ग्लेशियरों के लिए भी संजीवनी साबित होगी. प्रदेश में लागातार हो रही बर्फबारी न सिर्फ यहां की फसलों के लिए बल्कि जलवायु संरक्षण के लिए भी फायदेमंद होगी.चमोली जिला की बात करें तो यहां ऊंचाई वाले इलाकों में जिस तरह से वर्ष 2010 के बाद वर्ष 2019 में अधिक मात्रा में बर्फबारी हुई है, वो यहां के काश्तकारों के लिए फायदेमंद रहेगी. रेमन मेग्सैसे पुरस्कार विजेता पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट का कहना है कि बर्फबारी से न सिर्फ ऊचांई वाले इलाकों में होने वाले फल व अन्य फसलों के उत्पादन में लाभ होगा बल्कि विशेष रूप से उन हिमनदों को भी लाभ होगा जो स्थानीय तापमान में आए बदलाव के कारण भी तेजी से पिघल रहे थे.ग्रामीण काश्तकारों की माने तो उनके लिए ये बारिश व बर्फबारी संजीवनी साबित हुई है. सेब की बागवानी करने वाले इंद्र सिंह राणा ने कहा कि इस बर्फबारी का असर सेब की फसलों पर भी देखने को मिलेगा. from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2GClxfj
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