उत्तराखंड में उतरायणी यानी मकर संक्रांति का पर्व पहाड़ों में विशेष महत्व रखता है. आज के दिन कुमाऊं में गंगा स्नान के बाद घर-घर जाकर एक-दूसरे को भेंट देने की परम्परा है. इस दौरान गुड़ के साथ पैसे भेंट स्वरूप दिया जाता है. इस दिन आटे और घी से घुघते बनाने का रिवाज है, तो कहीं पर खिचड़ी की भी परम्परा है. दंतकथाओं में कहा जाता है कि चंद्र शासक कल्याण चंद्र का कोई संतान नहीं था. कल्याण चंद्र ने यहां देवी देवताओं के मठों का भ्रमण किया, जिसके बाद बागनाथ की कृपा से उनको निर्भय चंद्र के रूप में संतान प्राप्त हुई. राजा के बेटे को गले की मोती माला बहुत पसंद थी. उसकी माता बेटे के जिद करने पर कहती थी कि तेरी मोती की माला कौवे को दे देती हूं. एक दिन राजा के मंत्री ने बेटे का अपहरण कर लिया. इस घटना को कौवों ने देख लिया, जिसके बाद राजा ने मंत्री के टुकड़े कर कौवों को खिला दिया.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी http://bit.ly/2Fu8i0m
No comments:
Post a Comment