पूरे देश में होली का रंग फाल्गुन माह में चढ़ता है. लेकिन उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल के कुछ हिस्सों में पौष के प्रथम रविवार से ही पहाड़ी होली गायन का दौर शुरू हो जाता है. बृज के बेहद करीब होना पहाड़ की इस होली को और खास बना देता है. चंद राजाओं के समय शुरू हुई कुमाऊंनी होली के ये सुर तकरीबन ढाई सौ साल पुराने हैं. शास्त्रीय संगीतों की बंदिशों में बंधी पहाड़ी शैली में गाई जाने वाली ये होली आज से कुमाऊं के हल्द्वानी समेत रामनगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, गंगोलीहाट, लोहाघाट, चंपावत के साथ ही पौड़ी और टिहरी में भी शुरू हो चुकी है. हल्द्वानी का हिमालय संगीत शोध संस्थान पहाड़ की इस होली को संवारने के लिए पिछले 25 सालों से जुटा है. कोशिश होली के बहाने पहाड़ की परंपरागत जड़ों को बचाए रखना है.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2S6J3ni
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