बारिश की कमी और जबर्दस्त पाले से कुमाऊं के तराई-भाबर में होने वाली टमाटर की फसल को अच्छा-खासा नुकसान हुआ है. रोगों की चपेट में आने से अच्छी किस्म का टमाटर बाजार में नहीं आ पा रहा है. टमाटर की पौध का ये हाल देख हल्द्वानी, गौलापार, कोटाबाग और ऊधमसिंह नगर जिले के किसान परेशान हैं. रात में पड़ने वाला पाला टमाटर की खेती के लिए काल साबित हो रहा. पाले की वजह से टमाटर की पौध पीली हो गई है. कुमाऊं के तराई इलाके में पैदा होने वाला टमाटर अपने खट्टेपन के कारण पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में काफी पसंद किया जाता है. लेकिन इस बार टमाटर झुलसा, सफेदा और काला रोग की चपेट में आ चुका है. यहां तक कि इसका एक्सपोर्ट भी रूक चुका है. यही नहीं घरेलू मंडियों में भेजे जाने वाले टमाटर की क्वालिटी पर भी इसका असर पड़ा है. एक बात साफ है कि खेत में चौपट फसल का सीधा असर शहरों में रहने वाले या खरीद कर सब्जी या टमाटर खाने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है. समय से पहले ही टमाटर के दाम ज्यादा हो सकते हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2Ckw7VC
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