उत्तराखंड 18 वर्षों का हो चुका है. इस दौरान प्रदेश में कई आपदाएं आई, जिनमें से खासकर 2010 की रुद्रप्रयाग और 2013 की केदारनाथ की भीषण प्राकृतिक आपदा प्रमुख है. सूबे में गाहे-बगाहे बाढ़, बादल फटना, तेज बारिश और भूस्खलन जैसे दंश झेले हैं. इन आपदाओं में भारी जान-माल का नुकसान हुआ, लेकिन आज भी उत्तराखंड में इन आपदाओं से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाएं. 2013 में आई केदारनाथ त्रासदी ने सूबे को पूरी तरह से झकझोर दिया. पर्यावरणविद इन प्राकृतिक आपदाओं के पीछ इलाके के अधिकांश क्षेत्रों का मध्य और उच्च हिमालय क्षेत्र में आना बताते हैं. आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक पीयूष रौतेला मानते हैं कि विभाग ने लोगों के बीच बड़े पैमाने पर जनजागरण अभियान और लोगों को बचाव के तरीके बताएं हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2FcmAmQ
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