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Wednesday, November 14, 2018

'कौन जाए जौक अब दिल्ली की गलियां छोड़के', अपनी बदहाली पर आंसू बहाता शाही शायर

जौक का जन्‍म 1789 में दिल्‍ली में ही हुआ था। उनके पिता शेख मोहम्‍मद रमजान मुगलों की फौज में सिपाही हुआ करते थे। जौक का बचपन काफी गरीबी में बीता और तालीम भी बस काम चलाऊ ही हुई।

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