उत्तराखंड के लोगों और पर्यावरण के अंतर्रसंबंध को चिपको आंदोलन ने पहली बार दुनिया के सामने रखा किया था. रामनगर में जैविक खेती की झंडाबरदार कही जाने वाली सावित्री गरजोला ने इसे एक बार फिर रेखांकित किया है. रामनगर में जैविक खेती कर रही इन महिलाओं की पर्यावरण के महत्व को लेकर समझ इतनी गहरी है कि उन्होंने जैविक खेती के गीत लिख दिए हैं. कुमाऊंनी में रचा गया ऐसा ही एक गीत आपके लिए जो कहता है- जैविक से पर्यावरण बचाएंगे, हम हरा भरा बनाएंगे जैविक से.... रसायन को कम करके, जैविक बढ़ाएंगे, इसके क्या-क्या फ़ायदे होते हैं, सबको बताएंगे.... पुरानी विधि को अपनाएंगे, जैविक खेती करेंगे, जैविक से पर्यावरण बचाएंगे, हम हरा भरा बनाएंगे जैविक से.... जैविक खाना खाकर नही होंगे बीमार, स्वस्थ रहेंगे हम-तुम और हमारा समाज सारा.... जड़ी बूटी के फायदे समझाएंगे, जड़ी बूटी को ही उगाएंगे, एक पेड़ काटेंगे तो 100 पेड़ लगाएंगे, वृक्षारोपण से हम हरियाली फैलाएंगे... जितना हमने इससे लिया उतना लौटाएंगे, पशु पक्षी जीव जंतु किसी को नहीं सताएंगे, वृक्षारोपण से हम हरियाली फैलाएंगे, जितना लिया है उतना लौटाएंगे, धरती माता को जहर से बचाएंगे, इसकी लंबी आयु के लिए जैविक खाद डालेंगे, अपना संतान धर्म निभाएंगे.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2Qve2bs
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