पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड की गौरवशाली व समृद्ध संस्कृतिक परम्परा भले ही पश्चिमी संस्कृति के दबाव में हाशिये पर चली गई हो लेकिन अब भी कुछ लोग इसे ज़िंदा रखने की कोशिशों में लगे हुए हैं. अच्छी बात यह भी है कि स्थानीय लोग ही नहीं अब विदेशी भी पहाड़ की संस्कृति की और आकर्षित हो रहे हैं. ऋषिकेश नगर निगम में जगन्नाथ यात्रा के मौके पर उत्तराखण्ड के पारंपारिक वाद्य यन्त्र वादकों को बुलाया गया था. ढोल, दमौ, मसकबीन, तुहरी जैसे वाद्यय यन्त्रों के सुर-ताल पर लोग झूमकर नाचे. पहाड़ में देवपूजन, शादी विवाह से लेकर विभिन्न सांस्कृतिक समारोहों में पहले इन्हें ही बजाया जाता था. नए बैंड आने के बाद ये हाशिए पर चले गए थे लेकिन अब फिर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. स्थानीय निवासी तो यहां तक बताते हैं कि ढोल-दमौ पर रिसर्च करने के बाद विदेशी इसे एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी में विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2PjF6h3
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